आज है कत्ल की रात ।
कत्ल की रात, आज की रात सभी का गर्दन पैसे की चक्कू से कटेगा
बिम्मी शर्मा, (व्यग्ँय)
आज है कत्ल की रात । मतदाताओं की ईमान और विवेक को पैसे कि खंजर से लहुलुहान करने की रात है आज । यह रात कालरात्री से भी ज्यादा है । क्यों कि आज के रात ही तय हो जाएगा कि कल के स्थानीय तह के निर्वाचन में कौन सा दल और उसका उम्मीदवार जितेगा ? महिनों से बकरी औ मुर्गा कटते आए मतदाता आज अपने उम्मीदवार के लिए हलाल होगें । आखिर में पैसे में बिकने वाले मतदाता की उम्र और इज्जत एक मुर्गे से ज्यादा नहीं होती । ईसी लिए आज जश्न की रात भी है । कई उम्मीदवारों के चेहरें पे हवाइंया उड रही है तो कई बिजयी भाव में मुस्कुरा रहे हैं । जिन उम्मीदवारों के पास नोट कि गड्डी है मतदाता का मन और मत उन्ही के पास है ।
आज की रात ही मतदाता महिलाओं के तन को साडी से ढका जाएगा और उनकी अंटी में चुपके से पैंसे खोंसे जाएगें । और कल यही साडी पहन कर महिलाएं वोट दे कर उम्मीदवारों का बेडा पार लगाएगी । पुरुषों को पैसा और मोबाइल दे कर खुश किया जाएगा । और कल खुशी, खुशी अपने मत को यह अपने ताडनहार उम्मीदवारों के लिए विदा करेगें । पैसे के आगे भगवान शँकर का तो तिसरा नेत्र खुल जाता है तो यह मतदाता कौन सा चिज है ।
आज ईधर का माल उधर का माल ईधर के तर्ज पर रात भर में ही ईधर का मतदाता उधर और उधर का मतदाता ईधर हो जाएगा । मतदाताओं की हेराफेरी और अदला, बदली से ही पता चल जाएगा जीत का सेशरा किस के शीर पर बंधेगा ? मेयर का एक उम्मीदवार जितने के लिए करोडों खर्च कर रहा है । यदि वह जीत कर जाएगा तो जरुर महानगर पालिका में अरबों रुपएं का वारे, न्यारे करेगा । जितना ज्यादा निर्वाचन में खर्च उतना ही ज्यादा असुली । मेयर का उम्मीदवार ही खुद को मिलने वाला वोट अपने विरोधी खेमे के उम्मीदवार को बेच चूका है ।
आज की रात ही तय हो जाएगा कि ऊंट किस करवट बैठेगा । किस के घर में दिवाली मनेगी और किस के मातम छाएगा आज की रात ही तय कर देगी । जो मेयर का उम्मेदवार जितेगा उस के घर में दशहरा और बांकी हारने वालों के घर में दशा लगेगी । सभी उम्मीदवार ओखली में सर दिए हैं तो मुसली से क्या डरना जैसी हालत में है । ईसी लिए हरेक रणनीति अपना कर भी वह चुनाव जितना चाहते हैं । आखिर में नगर पिता बनने का गौरव जो हासिल होगा । साम, दाम, दंड, भेद का हरेक सूत्र आज की रात प्रयोग में लाया जाएगा । मान, मनौव्वल से हो या धमका कर हो मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के शतरंज कि बिसात पर गोटी बिछ चूकी है ।
यह मौन अवधी उम्मीदवारों के लिए मौत की अवधी कि तरह हो गई है । उम्ीदवार मौन रह कर ही ईशारे से ही अपना सब काम फतह कर रहा हैं । सभी उम्मीदवार अति आत्म बिश्वास से भरे हुए हैं और सभी को लगता है कि सिर्फ उही योग्य और लायक है मेयर बने के लिए और वहीं जितेगें और उन्ही को जितना चाहिए । कोई भी उम्मीदवार आईने में अपना काला चेहरा देखना नहीं चाहता । क्यों कि ईन सभी काले कर्तुत करने वाले उम्मीदवारों को आज की रात यानी कि कत्ल की रात का ईंतजार है । कत्ल की रात ही वह अपने विरोधियों का मानसिक रुप से कत्ल कर के अपना जीत का परचम फहराएगें । क्यों कि ईन उम्मीदवारों अच्छी तरह मालुम है कि एक पाव सब्जी खरिदते समय मोल, भाव करने अनेक मिनमेख निकाल कर खरिदने वाले ग्राहक जब मतदाता बन जाते हैं तब बिल्कुल अंधे हो जाते है और कुछ रुपयों मे अपना ईमान बेच कर देश और अपने शहर का लुटिया डुबोते हैं ।
बाद में यही मतदाता अपने शहर या देश का विकास नहीं होने पर शिकायत करने में भी पिछे नहीं हट्ते । चीट भी ईन का और पट भी ईन का । ईसी लिए आज की रात सब ईमान के तराजु पर तौले जाएगें और सभी का गर्धन पैसे की चक्कू से कटेगा । क्यों कि आज कत्ल की रात है । और कत्ल के रात में मतदाताओं की आँख और चेतना का कत्ल हो जाता है । अब अंधा और मुर्ख मतदाता तो दुसरों के सिखाए हुए रास्ते पर ही चलेगा और उन्ही को वोट देगा । जिन्होने उसकी अच्छी तरह खिदमत की हो । आज नजाकत कि रात है जो पूरे शराब और शबाब पर है । क्यों कि यह कत्ल की रात है अपना गर्धन आगे किजिए रेट्ने के लिए ।
- Himalini
http://www.himalini.com/local-election-in-madhesh-2074-2.html
ReplyDeletekindly put link in this article